संदेश

Units and dimensions

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विज्ञान (Science): - किसी भी ज्ञान का क्रमबद्ध अध्ययन को विज्ञान कहा जाता है।  विज्ञान की शाखाएं (branches of science):- विज्ञान की दो शाखायें है--- भौतिक विज्ञान(physical science):इसे भी दो भागों में बंटा गया है भौतिकी(Physics) रसायनशास्त्र(Chemistry) प्राकृतिक विज्ञान (Natural science):- इसे भी दो भागों में बंटा गया है--- पादप विज्ञान या वनस्पति विज्ञान ( Botany) जंतु विज्ञान या प्राणी विज्ञान ( Zoology) भौतिकी (Physics): - विज्ञान की वह शाखा जिसमे पदार्थ के बाहरी गुणों का अध्ययन किया जाता है उसे भौतिकी कहा जाता है।           भौतिकी में गणनाओं का विशेष महत्व है इसलिए इसे गणनाओं का विज्ञान भी कहा जाता है। Physics is the science of measurements. Branches of physics:- भौतिकी की कई शाखाएं है । सुविधा के अनुसार इसे निम्न शाखाओं में बंटा जाता है---- यांत्रिकी (Mechanics) या सामान्य भौतिकी (general physics) ऊष्मा (Heat) तरंग विज्ञान (Wave science) प्रकाश (Light) स्थिर वै...

Gene expression

जीन अभिव्यक्ति (Gene expression) जीन:-  DNA  का वह खंड जो किसी एक प्रोटीन संश्लेषण या अनुवांशिक गुण के लिए उत्तरदायी होता है उसे जीन (gene) कहा जाता है। मेंडल के अनुवांशिकता के नियमों में इसे फैक्टर कहा जाता है। जीन के प्रकार (kinds of gene):- कार्य के आधार पर जीन कई प्रकार के होते है:- संरचनात्मक जीन रेगुलेटरी जीन सक्रिय (एक्टिव) जीन निष्क्रीय जीन जंपिंग जीन प्रमोटर जीन etc जीन अभिव्यक्ति:- कोई जीन कैसे अपना कार्य करता है तथा वह कैसे switch on या off होता है इन्ही क्रियाओं को सम्मिलित रूप से जीन एक्सप्रेशन या जीन अभिव्यक्ति कहा जाता है।

विद्युत रासायनिक श्रेणी

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विद्युत रासायनिक श्रेणी (Electrochemical series) :- जब तत्वों को उनके मानक इलेक्ट्रोड विभव के आधार पर सजाते है तो उसे विद्युत रासायनिक श्रेणी कहा जाता है। कुछ तत्वों के मानक इलेक्ट्रोड विभव को अवरोही क्रम में नीचे की सारणी में दर्शाया गया है। विद्युत रासायनिक श्रेणी की उपयोगिता:- E 0 का मान जितना ही कम होता है, उस तत्त्व में आयन बनने की प्रवृत्ति उतनी ही अधिक होती है। जैसे Li के लिए E 0 का मान सबसे कम है इसलिए इसमें आयन में बदलने की प्रवृत्ति सबसे अधिक होती है। इस श्रेणी की सहायता से यह पूर्वानुमान लगाया जा सकता है कि कोई धातु किसी अम्ल के जलीय विलयन से H मुक्त कर सकती है या नहीं ।जिस तत्व के लिए E 0 का मान का मान शून्य से कम होगा अर्थात ऋणात्मक होगा  वह H मुक्त कर सकती है । इस सारणी की कोई भी धातु अपने नीचे वाले धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती है। इस सारणी की सहायता से तत्वों के ऑक्सिकारक और अवकारक शक्तियों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। E 0 का मान कम होने पर अवकारक शक्ति अधिक होती है इलेक्ट्रोड विभव की सहायता से रेडॉक्स अभिक्र...

हमारा इम्यून सिस्टम कैसे कार्य करता है?

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हमारा इम्यून सिस्टम क्या करता है वायरस को हराने के लिए ? . ज्यादातर लोग कोरोना वायरस से इन्फेक्ट होके अपने आप ठीक हो जा रहे हैं। कैसे ? . एक बड़ा युद्ध होता है बाकायदा ! . #वायरस_का_हमला : वायरस आया शरीर में, 4 दिन गले में रहा, फिर लंग्स में उतर गया, लंग्स में एक सेल के अंदर घुसा और उसके रिप्रोडक्शन के तरीके को इस्तेमाल करके खुद की copies बना ली, फिर सारी copies मिलके अलग अलग सेल्स को अंदर घुसकर ख़त्म करना शुरू कर देती है। अब बहुत सारे वायरस हो गए हैं फेफड़ों में, मौत के करीब पहुँचने लगता है इंसान। शुरू में वायरस फेफड़ों के epithelial सेल्स को इन्फेक्ट करता है। वायरस अभी जंग जीत रहा होता है। . हमारा इम्यून सिस्टम #शरीर_के_सेनापति_तक_खबर_पहुँचती_है : हमारे शरीर का सेनापति होता है हमारा इम्यून सिस्टम, इम्यून सिस्टम के पास सभी दुश्मनों का लेखा जोखा होता है की किसपर कौनसा अटैक करना है, एंटी-बॉडीज की एक सेना तैयार की जाती है और वायरस पर हमले के लिए भेज दी जाती है। . #एंटी_बॉडी_सेना_की_रचना : एंटीबाडी सेना की रचना अटैक के तरीके को देखकर होती है, अगर वो वायरस...

वैद्युत रसायन 12th class chemistry chapter 3

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वैद्युत रसायन  भौतिक रसायन की वह शाखा जिसमे विद्युत ऊर्जा , रासायनिक ऊर्जा तथा इनके पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है उसे वैद्युत रसायन कहा जाता है।         इसके अंतर्गत दो प्रकार की अभिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है--- वैद्युत अपघटन (electrolysis) विद्युत रासायनिक अभिक्रिया (electrochemical reaction) वैद्युत अपघटन (electrolysis) किसी यौगिक की द्रवित अवस्था या विलयन की अवस्था मे विद्युत धारा प्रवाहित कर यौगिक को अपघटित करने की क्रिया को वैद्युत अपघटन अभिक्रिया कहा जाता है। वैद्युत अपघटन की क्रिया में विद्युत ऊर्जा खर्च की जाती है और रासायनिक अभिक्रिया सम्पन्न की जाती है। वैद्युत अपघटन की क्रिया एक वैद्युत अपघटनी सेल में कराई जाती है। विद्युत रासायनिक अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया जिससे विद्युत की उत्पत्ति होती है तो उसे विद्युत रासायनिक अभिक्रिया कहा जाता है। इसकी चर्चा दूसरे लेख में किया जाएगा।         आगे बढ़ने से पहले हम कुछ महत्वपूर्ण बातों को जान लेते है ।  वैद्युत अपघट्य ( Electrolytes ) ...

God is not great

गॉड इज नॉट ग्रेट!    21वीं सदी में दुनिया में जो पांच दस सबसे महान नास्तिक विचारक पैदा हुए हैं, उनमें से *रिचर्ड डॉकिंस* के बाद सबसे बड़ा नाम आता है, *किस्तोंपर हीचेन* का । उन्होंने 2007 में  *"गॉड इज नॉट ग्रेट"* नाम की किताब लिखी और उस किताब में उन्होंने  सैकड़ों सबूत दे कर यह साबित करने की प्रयास किया, कि पिछले 5000 साल में मानव जाति पर जितने भी महा भयंकर संकट आए हैं उस दौरान  दुनिया के किसी भी ईश्वर, अल्लाह या गॉड ने मानव जाति की कोई मदद नहीं की। *मानव जाति में जो मुश्किल से 5% बुद्धिमान लोग हैं जिन्होंने मानव जाति को हर संकट के समय कोई न कोई रास्ता ढूंढ कर दिया है ।*     लेकिन धर्म के नाम पर जो लोग अपना पेट पालते हैं और अपने आप को धर्म का ठेकेदार और ईश्वर का  प्रतिनिधि समझते हैं उन लोगों ने *मानव जाति के जो 95% लोग है, और जो जन्मजात बुद्धिहीन है, और जो किसी न किसी काल्पनिक सहारे के बगैर जी ही नहीं सकते,* ऐसे लोगों को बार-बार धर्म ने अपने जाल में जकड़ कर रखा है। दुर्भाग्य से आज किस्तोंपर हिचेन हमारे बीच नहीं है, लेकिन कोरोना वायरस ने फिर ए...

Mutation

उत्परिवर्तन (Mutation) उत्परिवर्तन जीन की संरचना, DNA की संरचना, गुणसूत्रों की संख्या या संरचना इत्यादि में अचानक हुए परिवर्तन को उत्परिवर्तन कहा जाता है। उत्परिवर्तन DNA प्रतिकृति बनने के समय घटित होता है। उत्परिवर्तन कायिक कोशिका (somatic cell) या जननिक कोशिका (genetic cell)  या दोनों में हो सकता है । जनन कोशिकाओं में होने वाला उत्परिवर्तन वंशानुगत होता है। उत्परिवर्तन की विशेषतायें उत्परिवर्तन अचानक होने वाली एक जैव घटना है। उत्परिवर्तन कोशिका विभाजन के समय होता है या DNA प्रतिकृति बनते समय होता है। इस घटना में जीन की संरचना, DNA की संरचना, गुणसूत्रों की संख्या या संरचना इत्यादि में परिवर्तन हो सकता है। उत्परिवर्तन एक जीनोटाइप परिवर्तन है । यह फेनोटाइप रूप से परिलक्षित हो भी सकता है या नही भी परिलक्षित हो सकता है अर्थात यह बाह्य रुप में दिखाई दे भी सकता है और न भी दिखाई दे सकता है। उत्परिवर्तन से लाभ या हानि हो सकता है। उत्परिवर्तन के कारण उत्परिवर्तन कई कारणों से होता है। इनमे से कुछ प्रमुख कारण निम्न है: - उत्परिवर्तन दाब के कारण :- उत्परि...

Download admit card d.el.ed

Download admit card D.El.Ed 2020 ERC NCTE से मान्यता प्राप्त एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से संबद्धता प्राप्त सरकारी एवं प्राईवेट शिक्षण संस्थानों में डी0एलएड0 (डिप्लोमा इन एलिमेन्ट्री एजुकेशन) सत्र-2020-22 में नामांकन के लिए बिहार बोर्ड द्वारा पहली बार डी0 एलएड0 संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन 28 मार्च को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में किया जायेगा. 🌀Educational News🌀* *28 मार्च को होगा डीएलएड का एग्जाम, यहां से डाउनलोड करें अपना एडमिट कार्ड !* Admit card available on 13.03.2020 Required .... User id & password 👇 *Click Here* 👇 Download your admit card Admit card direct link Download Notification ये भी  देखें। ... 1. सहप्रभाविता (Codominance) 2. अपूर्ण प्रभावित (Incomplete dominance) 3. Restriction enzyme 4 . मेंडल के अनुवांशिकता के नियम 5 . अलैंगिक जनन 6 .  राष्ट्रीय मतदाता दिवस 7.  स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में अंतर 8.  आर्मी दिवस 9.  "Bharat is my home" Summary 10.  Poem "Snake"...

Linkage

Linkage सहलग्नता परिभाषा:- सहलग्नता जीनों की दोस्ती है। जब दो या दो से अधिक जीनों की वंशागति एक साथ होता है तो उसे सहलग्नता कहते है तथा ऐसे जीनों को सहलग्न जीन कहा जाता है। प्रायः सहलग्न जीन एक ही गुणसूत्र पर पाए जाते है।         सहलग्नता के कारण F2 पीढ़ी में phenotype ratio 9:3:3:1 के स्थान पर 7:1:1:7 हो जाता है। अर्थात जनकों  की लक्षण वाले संततियों की संख्या अधिक होती है। मेंडल के अनुवांशिकता के नियम एवं सहलग्नता          सहलग्नता या linkage मेंडल के अनुवांशिकता के नियमों का पालन नहीं करता है। मेंडल के स्वतंत्र संकलन या अपव्यूहन के नियमानुसार वंशागति के क्रम में एलील अलग अलग हो जाते है तथा इनकी वंशगति एक दूसरे से स्वतंत्र होता है लेकिन सहलग्नता में जीन या एलील स्वतंत्र नही होता है । जिस कारण phenotype ratio  बदल जाता है। Download model paper

Multiple allelism

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Multiple Allelism बहुविकल्पता       जब कोई लक्षण दो से अधिक एलिल पर निर्भर करता है तो उसे बहुविकल्पता कहते है। अर्थात  जब किसी लक्षण के लिए दो से अधिक विकल्प हो या दो से अधिक एलिल उत्तरदायी हो तो उसे बहुविकल्पता कहते है। बहुविकल्पता के उदाहरण  खरगोश के त्वचा के रंग के लिए चार एलिल जिम्मेदार होते है। मानव रक्त समूह के लिए तीन एलिल जिम्मेदार होते है। इसी प्रकार फलमक्खी के आंख के रंग के लिए 15 एलिल जिम्मेदार होते है। अर्थात खरगोश के त्वचा के रंग, मानव रक्त समूह, फलमक्खी के आंख का रंग इत्यादि बहुविकल्पता के उदाहरण है। बहुविकल्पता एवं आनुवांशिकी बहुविकल्पता मेंडल के आनुवांशिकी के नियमों का अपवाद है। मेंडल के नियमानुसार किसी भी लक्षण के लिए सिर्फ दो ही विकल्प होते है । जैसे लंबा और बौना , लाल और सफेद, गोल और झुर्रीदार इत्यादि। लेकिन जब कार्ल लैंडस्टनर ने मानव रक्त समूह की खोज की तो इस धरना का अंत हो गया। अब साबित हो गया है कि बहुत ऐसे लक्षण है जिसके लिए दो से अधिक विकल्प होते है। मानव रक्त समूह मानव रक्त समूह :- मानव रक्त समूह का ...