नियंत्रण एवं समन्वय
पाठ 5. नियंत्रण एवं समन्वय
जीवविज्ञान वर्ग 10 के ch5 के महत्वपूर्ण प्रश्नQ1. नियंत्रण एवं समन्वय से आप क्या समझते है?
Ans:- हमारा शरीर असंख्य कोशिकाओं से बना है। इनकी संरचना एवं कार्य भिन्न भिन्न होते है। इन कार्यों को एक साथ मिलकर तथा आवश्यकता के अनुसार करने की प्रक्रिया को नियंत्रण एवं समन्वय कहते है।
दूसरे शब्दों, शरीर के सभी अंगों एवम अंगतंत्रो का तालमेल के साथ कार्य करना ही नियंत्रण एवं समन्वय कहते है।
Q2.नियंत्रण एवं समन्वय क्यों जरूरी है?
Ans:- जैव कार्यों के सफल संचालन के लिए सभी जीव के अंगों एवं अंगतंत्रो का समन्वय तथा नियंत्रण जरूरी है।
Q3.सजीवों में नियंत्रण एवं समन्वय कितने प्रकार से होता है?
Ans:- सजीवों में नियंत्रण एवं समन्वय दो प्रकार से होता है:-
- तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय तथा
- रासायनिक नियंत्रण एवं समन्वय
Q4 पौधों में नियंत्रण एवं समन्वय किस प्रकार होता है?
Ans:- पौधों में नियंत्रण एवं समन्वय रासायनिक होता है । इसके लिए पेड़ पौधों में बाह्य उद्दीपनों से रासायनिक पदार्थों का संश्लेषण होता है तथा नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य सम्पन्न होता है।
Q5 उद्दीपन किसे कहते है?
Ans :- वे आंतरिक तथा बाह्य कारक जो किसी जीव को कोई कार्य करने के लिए मजबूर करता बै तो उसे उद्दीपन कहते है। जैसे गर्मी के मौसम में कौवा मुख खोलकर रखता है तो गर्मी उद्दीपन हुआ। पेड़ पौधों में अनुवर्तन की क्रिया भी उद्दीपन का एक उदाहरण है।
Q6. अनुवर्तन किसे कहते है?
Ans :- उद्दीपनों से प्रभावित होनेवाली पौधों की गतियों को अनुवर्तिनी गति या अनुवर्तन या tropism कहते है। जैसे झूई-मुई के पौधे के पत्ते का सिकुड़ना , प्रकाश की दिशा में पौधे का वृद्धि इत्यादि।
Q7. अनुवर्तन कितने प्रकार का होता है?
Ans:- उद्दीपनों की प्रकृति के आधार पर अनुवर्तन निम्न प्रकार के होते है:-
- प्रकाश अनुवर्तन ( phototropism)
- गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism)
- रासायनिक अनुवर्तन (Chemotropism)
- जलानुवर्तन (Hydrotropism)


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